आ ही गए जब हद्दे नज़र में आ जाते
लौट के आंसू अपने घर में आ जाते
छू लेते तो आँखें पत्थर हो जातीं
सुन लेते तो दाग़ जिगर में आ जाते
होश में सौ अंदेशे थे रुस्वाई के
रुस्वाई से आप खबर में आ जाते
चाँद अधूरे क़िस्से कुछ अनदेखे ख़्वाब
दीवानों के काम सफ़र में आ जाते
आदत हो जाती गर्दिश पैमाई की
तुम भी हमारे साथ सफ़र में आ जाते
एक साये की ख़ातिर कौन ठहरता है
सन्नाटे कुछ और शजर में आ जाते
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