Thursday, March 12, 2020

ग़ज़ल

आ ही गए जब हद्दे नज़र में आ जाते
लौट के आंसू अपने घर में आ जाते

छू लेते तो आँखें पत्थर हो जातीं
सुन लेते तो दाग़ जिगर में आ जाते

होश में सौ अंदेशे थे रुस्वाई के
रुस्वाई से आप खबर में आ जाते

चाँद अधूरे क़िस्से कुछ अनदेखे ख़्वाब
दीवानों के काम सफ़र में आ जाते

आदत हो जाती गर्दिश पैमाई  की
तुम भी हमारे साथ सफ़र में आ जाते

एक साये की ख़ातिर कौन ठहरता है
सन्नाटे कुछ और शजर में आ जाते

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