MANZAR......
Zaum-e-sannaai sukhanwar se gaya
yaani ek aaseb tha sar se gaya
shauq milne ka bicharne ka malaal
waswasa ye bhi mere dar se gaya
Zindgi ek barg he sookha hua
shakh se toota to manzar se gaya
Saturday, September 19, 2009
Friday, September 4, 2009
Wednesday, September 2, 2009
रहगुज़र.....
जो चाहते थे वही बात कर नहीं आई
हमारे साथ भी गर्देसफ़र नहीं आई
मैं जंग हार के लौटा तो इतना तन्हा था
मिरी अना भी मिरे साथ घर नहीं आई
उसे किसी ने कभी बेवफ़ा नहीं समझा
उसे किसी मैं शराफ़त नज़र नहीं आई
बस एक बार हंसा था किसी के जाने पर
फिर उसके बाद हँसी लौट कर नहीं आई
हमारी आँखों में मंज़िल तो आ गयी लेकिन
हमारे पांव तले रहगुज़र नहीं आई
जो चाहते थे वही बात कर नहीं आई
हमारे साथ भी गर्देसफ़र नहीं आई
मैं जंग हार के लौटा तो इतना तन्हा था
मिरी अना भी मिरे साथ घर नहीं आई
उसे किसी ने कभी बेवफ़ा नहीं समझा
उसे किसी मैं शराफ़त नज़र नहीं आई
बस एक बार हंसा था किसी के जाने पर
फिर उसके बाद हँसी लौट कर नहीं आई
हमारी आँखों में मंज़िल तो आ गयी लेकिन
हमारे पांव तले रहगुज़र नहीं आई
परचम....
एक खु़शी के लिए मातम नहीं फेंके जाते
फ़तह के बाद भी परचम नहीं फेंके जाते
ये ज़मीनों से खलाओं की तरफ़ जाते हैं
आसमानों से कभी ग़म नहीं फेंके जाते
उसने जाते हुए हंसने की दुआएं दी हैं
यूं किसी ज़ख्म पे मरहम नहीं फेंके जाते
रंज बढ़ते हैं तो मैं ज़ोर से हंस पड़ता हूँ
अपनी आंखों से ये दिरहम नहीं फेंके जाते
एक खु़शी के लिए मातम नहीं फेंके जाते
फ़तह के बाद भी परचम नहीं फेंके जाते
ये ज़मीनों से खलाओं की तरफ़ जाते हैं
आसमानों से कभी ग़म नहीं फेंके जाते
उसने जाते हुए हंसने की दुआएं दी हैं
यूं किसी ज़ख्म पे मरहम नहीं फेंके जाते
रंज बढ़ते हैं तो मैं ज़ोर से हंस पड़ता हूँ
अपनी आंखों से ये दिरहम नहीं फेंके जाते
Sunday, August 30, 2009
Friday, August 28, 2009
Saturday, July 25, 2009
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